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मैं अब भी खुद से हारता नहीं

MrDream

Wellknown Ace
एक कोशिश है गजल लिखने की ... आप को पसंद आये शायद

दिन तो यूँ ही ढल जाता है, रात मगर ये कटती नहीं,
तेरी यादों के बिन अब तो, कोई घड़ी भी गुजरती नहीं।

मीठी-मीठी यादें तेरी, दिल में आज भी रहती हैं,
लाख भुलाना चाहूँ फिर भी, ये यादें कम होती नहीं।

खुशियों से भरी ज़िंदगी में, कैसी ये फिर खामोशी आई,
तुम क्यों मुझसे दूर गईं, ये बात दिल से उतरती नहीं।

जाना ही था तुमको अगर तो, मुझसे मिली ही क्यों थीं तुम?
दिल में उठता ये सवाल मगर, होंठों तक कभी आता नहीं।

कभी ये सोचूँ, तुमसे मिलना शायद मेरी भूल थी,
सोच के ही शर्मिंदा होता हूँ, दिल मगर ये मानता नहीं।

तेरी यादों की बारिश में, आँखें आज भी भीगती हैं,
आँसू थम भी जाएँ लेकिन, दिल की नमी सूखती नहीं।

वक़्त बहुत कुछ छीन लेता है, कहते हैं ये लोग मगर,
वक़्त गुज़रता जाता है, तेरा असर कुछ घटता नहीं।

तेरे बिन जीना सीख रहा हूँ, हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके,
दर्द बहुत है सीने में, फिर भी मैं खुद से हारता नहीं।

तू नहीं है पास मेरे, फिर भी दिल में बाकी है,
सब कुछ हार गया हूँ लेकिन—मैं अब भी खुद से हारता नहीं।
 
एक कोशिश है गजल लिखने की ... आप को पसंद आये शायद

दिन तो यूँ ही ढल जाता है, रात मगर ये कटती नहीं,
तेरी यादों के बिन अब तो, कोई घड़ी भी गुजरती नहीं।

मीठी-मीठी यादें तेरी, दिल में आज भी रहती हैं,
लाख भुलाना चाहूँ फिर भी, ये यादें कम होती नहीं।

खुशियों से भरी ज़िंदगी में, कैसी ये फिर खामोशी आई,
तुम क्यों मुझसे दूर गईं, ये बात दिल से उतरती नहीं।

जाना ही था तुमको अगर तो, मुझसे मिली ही क्यों थीं तुम?
दिल में उठता ये सवाल मगर, होंठों तक कभी आता नहीं।

कभी ये सोचूँ, तुमसे मिलना शायद मेरी भूल थी,
सोच के ही शर्मिंदा होता हूँ, दिल मगर ये मानता नहीं।

तेरी यादों की बारिश में, आँखें आज भी भीगती हैं,
आँसू थम भी जाएँ लेकिन, दिल की नमी सूखती नहीं।

वक़्त बहुत कुछ छीन लेता है, कहते हैं ये लोग मगर,
वक़्त गुज़रता जाता है, तेरा असर कुछ घटता नहीं।

तेरे बिन जीना सीख रहा हूँ, हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके,
दर्द बहुत है सीने में, फिर भी मैं खुद से हारता नहीं।

तू नहीं है पास मेरे, फिर भी दिल में बाकी है,
सब कुछ हार गया हूँ लेकिन—मैं अब भी खुद से हारता नहीं।
Beautiful...
I wish someone would write a reply to this.. it feels incomplete in a way..
 
Beautiful...
I wish someone would write a reply to this.. it feels incomplete in a way..
Ghazal ... is always unanswered ... one who reads or listens, decide answers from their own perspective.

And about reply .... rarely people like shayari, I just write without expectations ... my happiness. I don't post all my writing anyway.
 
A ghazal is as beautiful as a flower.
Its reply would be like a butterfly missing the flower that is no longer there.
 
एक कोशिश है गजल लिखने की ... आप को पसंद आये शायद

दिन तो यूँ ही ढल जाता है, रात मगर ये कटती नहीं,
तेरी यादों के बिन अब तो, कोई घड़ी भी गुजरती नहीं।

मीठी-मीठी यादें तेरी, दिल में आज भी रहती हैं,
लाख भुलाना चाहूँ फिर भी, ये यादें कम होती नहीं।

खुशियों से भरी ज़िंदगी में, कैसी ये फिर खामोशी आई,
तुम क्यों मुझसे दूर गईं, ये बात दिल से उतरती नहीं।

जाना ही था तुमको अगर तो, मुझसे मिली ही क्यों थीं तुम?
दिल में उठता ये सवाल मगर, होंठों तक कभी आता नहीं।

कभी ये सोचूँ, तुमसे मिलना शायद मेरी भूल थी,
सोच के ही शर्मिंदा होता हूँ, दिल मगर ये मानता नहीं।

तेरी यादों की बारिश में, आँखें आज भी भीगती हैं,
आँसू थम भी जाएँ लेकिन, दिल की नमी सूखती नहीं।

वक़्त बहुत कुछ छीन लेता है, कहते हैं ये लोग मगर,
वक़्त गुज़रता जाता है, तेरा असर कुछ घटता नहीं।

तेरे बिन जीना सीख रहा हूँ, हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके,
दर्द बहुत है सीने में, फिर भी मैं खुद से हारता नहीं।

तू नहीं है पास मेरे, फिर भी दिल में बाकी है,
सब कुछ हार गया हूँ लेकिन—मैं अब भी खुद से हारता नहीं।
Time may change a lot of things, but some memories leave a mark that stays. Beautifully written
 
Wish someone writes ... or I will right what you are indicating
एक कोशिश है गजल लिखने की ... आप को पसंद आये शायद

दिन तो यूँ ही ढल जाता है, रात मगर ये कटती नहीं,
तेरी यादों के बिन अब तो, कोई घड़ी भी गुजरती नहीं।

मीठी-मीठी यादें तेरी, दिल में आज भी रहती हैं,
लाख भुलाना चाहूँ फिर भी, ये यादें कम होती नहीं।

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तुम क्यों मुझसे दूर गईं, ये बात दिल से उतरती नहीं।

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दिल में उठता ये सवाल मगर, होंठों तक कभी आता नहीं।

कभी ये सोचूँ, तुमसे मिलना शायद मेरी भूल थी,
सोच के ही शर्मिंदा होता हूँ, दिल मगर ये मानता नहीं।

तेरी यादों की बारिश में, आँखें आज भी भीगती हैं,
आँसू थम भी जाएँ लेकिन, दिल की नमी सूखती नहीं।

वक़्त बहुत कुछ छीन लेता है, कहते हैं ये लोग मगर,
वक़्त गुज़रता जाता है, तेरा असर कुछ घटता नहीं।

तेरे बिन जीना सीख रहा हूँ, हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके,
दर्द बहुत है सीने में, फिर भी मैं खुद से हारता नहीं।

तू नहीं है पास मेरे, फिर भी दिल में बाकी है,
सब कुछ हार गया हूँ लेकिन—मैं अब भी खुद से हारता नहीं।
beautiful...:highfive:
 
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