प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है,
बाकी कुछ देखना नहीं होता, ना कोई बंधन होता है।
हल्के से मुस्कुराते हरे-भरे पेड़ हों,
या पंछियों का मधुर-मधुर सा गान हो,
आसमान में बादलों के बदलते हुए रूप हों,
या अचानक बिजली की तेज़ कड़कड़ाहट हो,
ये सब कुछ अच्छा लगता है, मन इनमें ही रम...