एक कोशिश है गजल लिखने की ... आप को पसंद आये शायद
दिन तो यूँ ही ढल जाता है, रात मगर ये कटती नहीं,
तेरी यादों के बिन अब तो, कोई घड़ी भी गुजरती नहीं।
मीठी-मीठी यादें तेरी, दिल में आज भी रहती हैं,
लाख भुलाना चाहूँ फिर भी, ये यादें कम होती नहीं।
खुशियों से भरी ज़िंदगी में, कैसी ये फिर खामोशी आई...