Siyaa004
Favoured Frenzy
जिस दिन मैं लिखूँगी.....
भीड़ को भ्रम लिखूँगी,
एकांत को सत्य लिखूँगी।
दोस्ती को फरेब लिखूँगी,
प्रेम को छल लिखूँगी।
रिश्तों को एक षडयंत्र लिखूँगी,
फ़िर रख दूँगी अपनी कलम वही.....
और आखिर में
खुद को हर रिश्ते, हर उम्मीद, हर मोह से
मुक्त लिखूँगी...
भीड़ को भ्रम लिखूँगी,
एकांत को सत्य लिखूँगी।
दोस्ती को फरेब लिखूँगी,
प्रेम को छल लिखूँगी।
रिश्तों को एक षडयंत्र लिखूँगी,
अपनों को मतलब का शहर लिखूँगी।
फ़िर रख दूँगी अपनी कलम वही.....
और आखिर में
खुद को हर रिश्ते, हर उम्मीद, हर मोह से
मुक्त लिखूँगी...


