MrDream
Wellknown Ace
मंज़िल पता नहीं लेकिन सफर तो चलता रहेगा
रास्ते होंगे हज़ार, लेकिन कहीं तो रुकना पडेगा
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राहें अलग हो सकती हैं, मंज़िल तो एक ही है,
हमसफ़र हों या न हों, मंज़िल तो एक ही है।
किसी का रास्ता आसान, किसी का मुश्किल,
ख़ुशियाँ हों या दर्द-ओ-ग़म, मंज़िल तो एक ही है।
कभी दो राहें मिलती हैं, कभी जुदा हो जाती हैं,
वफ़ा के टूटे वादों के बाद, मंज़िल तो एक ही है।
राह-ए-वफ़ा में अज़्म-ए-समीम ने तन्हा किया,
दुनिया के दर्द-ओ-ग़म में भी, मंज़िल तो एक ही है।
मस्तमौला मिज़ाज, दुनिया की बंदिशों से दूर,
बेफ़िक्र भी, बेक़रार भी—मंज़िल तो एक ही है।
रास्ते होंगे हज़ार, लेकिन कहीं तो रुकना पडेगा
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राहें अलग हो सकती हैं, मंज़िल तो एक ही है,
हमसफ़र हों या न हों, मंज़िल तो एक ही है।
किसी का रास्ता आसान, किसी का मुश्किल,
ख़ुशियाँ हों या दर्द-ओ-ग़म, मंज़िल तो एक ही है।
कभी दो राहें मिलती हैं, कभी जुदा हो जाती हैं,
वफ़ा के टूटे वादों के बाद, मंज़िल तो एक ही है।
राह-ए-वफ़ा में अज़्म-ए-समीम ने तन्हा किया,
दुनिया के दर्द-ओ-ग़म में भी, मंज़िल तो एक ही है।
मस्तमौला मिज़ाज, दुनिया की बंदिशों से दूर,
बेफ़िक्र भी, बेक़रार भी—मंज़िल तो एक ही है।