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Gussa

Deewana

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गुस्सा मेरा शौक नहीं,
बस जब मन की तकलीफ बता नहीं पाता,
तो चिड़चिड़ापन बनकर बाहर आता है।

हर बार नाराज़गी के पीछे नफ़रत नहीं होती,
कभी-कभी बहुत सारी अनकही बातें होती हैं।

कभी थकान होती है,
कभी उम्मीद टूटती है,
और कभी किसी दर्द को शब्दों में कह पाना मुश्किल होता है।


इसलिए अगर कभी मेरा मिज़ाज़ बदला हुआ लगे,
तो मेरे गुस्से को मत देखना...
एक बार मेरे अंदर जमा हुई

तकलीफ को समझने की कोशिश करना।​
 
गुस्सा मेरा शौक नहीं,
बस जब मन की तकलीफ बता नहीं पाता,
तो चिड़चिड़ापन बनकर बाहर आता है।

हर बार नाराज़गी के पीछे नफ़रत नहीं होती,
कभी-कभी बहुत सारी अनकही बातें होती हैं।

कभी थकान होती है,
कभी उम्मीद टूटती है,
और कभी किसी दर्द को शब्दों में कह पाना मुश्किल होता है।


इसलिए अगर कभी मेरा मिज़ाज़ बदला हुआ लगे,
तो मेरे गुस्से को मत देखना...
एक बार मेरे अंदर जमा हुई

तकलीफ को समझने की कोशिश करना।​
True pain is a completely unspoken language and our irritability is just the sound of that pain hitting a wall.
 
nicely written ....

जैसे दिन आगे जाएंगे, जैसे उम्र बढती जायेगी, जैसे और अनुभव आएंगे....

गुस्से पे काबू पाना भी सीख ही जाओगे...

गुस्सा बस नुकसान करता है... अपना भी और दुसरो का भी
 
nicely written ....

जैसे दिन आगे जाएंगे, जैसे उम्र बढती जायेगी, जैसे और अनुभव आएंगे....

गुस्से पे काबू पाना भी सीख ही जाओगे...

गुस्सा बस नुकसान करता है... अपना भी और दुसरो का भी
Sahi kaha...
Gusse se nuksaan jyada hai..

Behtr hai kabu karna
 
True Feelings , You said exactly the right thing.

This is a very profound and sensitive matter.


जब इंसान के भीतर का दर्द , थकान या उम्मीदें शब्दों में बयां नहीं हो पातीं , तो वह कई बार गुस्से का रूप ले लेती है।
 
True Feelings , You said exactly the right thing.

This is a very profound and sensitive matter.


जब इंसान के भीतर का दर्द , थकान या उम्मीदें शब्दों में बयां नहीं हो पातीं , तो वह कई बार गुस्से का रूप ले लेती है।
Bilkul..
Aur sabse bdi baat apno se hi na kah pana kitna dard deta hai usi gusse me dikhta hai..
 
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