छत पर
कपड़े सूख रहे थे।
हर कपड़े का
अपना आकार था,
अपना रंग,
अपनी सिलवटें।
हवा आई
तो सब एक साथ
लहराने लगे।
मनुष्य भी ऐसे ही हैं।
अलग अलग घर,
अलग अलग कहानी,
अलग अलग दुःख।
मगर कोई एक हवा
चलती है
समय की,
और हम सब
एक ही दिशा में
लहराने लगते हैं।
फ़र्क़ बस इतना है
कपड़े सूखकर
फिर तह हो जाते हैं,
इंसान सूखते-सूखते
थोड़ा बदल जाता है!!!

कपड़े सूख रहे थे।
हर कपड़े का
अपना आकार था,
अपना रंग,
अपनी सिलवटें।
हवा आई
तो सब एक साथ
लहराने लगे।
मनुष्य भी ऐसे ही हैं।
अलग अलग घर,
अलग अलग कहानी,
अलग अलग दुःख।
मगर कोई एक हवा
चलती है
समय की,
और हम सब
एक ही दिशा में
लहराने लगते हैं।
फ़र्क़ बस इतना है
कपड़े सूखकर
फिर तह हो जाते हैं,
इंसान सूखते-सूखते
थोड़ा बदल जाता है!!!
