Alright. Take care. Goodbye.Enough now. Good bye.
प्रेम हे कहाँ ?शायद बात यही है कि हम मोह को प्रेम और अपनी अपेक्षाओं को अपना अधिकार समझ बैठते हैं। जब दूसरा हमारी इच्छा के अनुसार नहीं चलता, तो हम अपने दुःख का कारण उसे मान लेते हैं।
लेकिन क्या प्रेम को समझने के लिए निस्वार्थ होना ज़रूरी है, या पहले यह देखना ज़रूरी है कि हम जिसे प्रेम कह रहे हैं, उसमें वास्तव में प्रेम कितना है और हमारी अपनी इच्छाएँ कितनी हैं?
शायद समझ की शुरुआत यहीं से होती है।

बहुत सुन्दर पाङ्तियाज़िंदगी और उम्मीदें
ज़िंदगी से हमने हज़ार सवाल किए,हर जवाब में नए ख़याल किए।
जो पल सामने था, उसे जी न सके,जो आने वाला था, उसी के इंतज़ार में रहे।
ज़िंदगी को बेहतर बनाने में उम्र गुज़र गई,और जो ज़िंदगी थी, वो इंतज़ार में गुज़र गई।