सबने कहा,
वक़्त सब बदल देता है...
मैंने देखा,
वक़्त सिर्फ़ मौक़ा देता है,
बदलना इंसान को पड़ता है।
वही सुबह,
वही रास्ते,
वही लोग...
बदलता है तो बस
देखने का नज़रिया,
हार के बाद उठने का हौसला,
और ख़ुद से किए हुए वादे।
क्योंकि वक़्त किसी की तक़दीर नहीं लिखता...
वो तो बस एक खाली पन्ना देता है।
कहानी कैसी होगी,
ये कलम पकड़ने वाला तय करता है।

वक़्त सब बदल देता है...
मैंने देखा,
वक़्त सिर्फ़ मौक़ा देता है,
बदलना इंसान को पड़ता है।
वही सुबह,
वही रास्ते,
वही लोग...
बदलता है तो बस
देखने का नज़रिया,
हार के बाद उठने का हौसला,
और ख़ुद से किए हुए वादे।
क्योंकि वक़्त किसी की तक़दीर नहीं लिखता...
वो तो बस एक खाली पन्ना देता है।
कहानी कैसी होगी,
ये कलम पकड़ने वाला तय करता है।

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