MrDream
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प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है,
बाकी कुछ देखना नहीं होता, ना कोई बंधन होता है।
हल्के से मुस्कुराते हरे-भरे पेड़ हों,
या पंछियों का मधुर-मधुर सा गान हो,
आसमान में बादलों के बदलते हुए रूप हों,
या अचानक बिजली की तेज़ कड़कड़ाहट हो,
ये सब कुछ अच्छा लगता है, मन इनमें ही रम जाता है,
जाने क्यों हर रंग में, दिल अपना खो जाता है।
प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है।
लता के लाड भरे सुरीले सुरों पर मन सवार हो जाता है,
कभी रफ़ी की मुलायम आवाज़ पर दिल हार जाता है,
सिर्फ़ संगीत सुनकर भी सिर अपने आप झूमने लगता है,
लहरों की सरगम में भी कोई गीत सुनाई देता है।
जीवन में संगीत होता है, और संगीत में बस प्रेम होता है।
प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है।
बच्चों की वो निश्छल हँसी, बड़ों की वो प्यार भरी डाँट,
किसी का वो बेफ़िक्र अंदाज़, उसका वो प्यारा सा रूठना,
गालों की वो जानलेवा डिंपल, आँखों की वो घायल कर देने वाली अदा,
उसका वो दिलकश, मनमोहक रूप—
ये सब कुछ अच्छा लगता है, इन सबसे भी प्रेम हो जाता है।
क्योंकि एक ही बात है…
प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है।
लोग कहते हैं प्रेम मतलब, किसी का हो जाना,
किसी की आँखों में अपना संसार पाना, उसकी हँसी में मुस्कुराना,
उसके रूठने पर उसे मनाना, उसके साथ हर पल को खास बनाना,
उसके होने से खुद को मुकम्मल पाना।
हाँ, ये भी प्रेम है…
मगर प्रेम सिर्फ़ इतना ही तो नहीं है, प्रेम तो हर उस एहसास में है,
जहाँ दिल बिना किसी वजह के मुस्कुराता है।
क्योंकि एक ही बात है…
प्रेम में दूसरा कुछ नहीं होता, प्रेम तो बस प्रेम होता है।



