जो कल तक बस एक मुलाक़ात का क़िस्सा था,
आज दिल के सबसे क़रीब बैठा हिस्सा था।
इस रिश्ते का नाम अब तक तय नहीं हुआ,
मगर इंतज़ार तो अब पहले से ज़्यादा था।
आज दिल के सबसे क़रीब बैठा हिस्सा था।
इस रिश्ते का नाम अब तक तय नहीं हुआ,
मगर इंतज़ार तो अब पहले से ज़्यादा था।

















heheheheh
