*एहसान मत कर*
अकेला खुश हूँ मैं अब परेशान मत कर,
*इश्क़ है तो इश्क़ कर एहसान मत कर।*
बहुत सुकून से गुज़र रही हैं मेरी तन्हाइयाँ,
*आकर फिर से कोई नया तूफ़ान मत कर।*
दिल में जगह नहीं है अब तेरे वादों के लिए,
*रहने दे मुझे अकेला, मुझ पे कोई अहसान मत कर।*