दिल ही तो है, कब किसपे आ जाए कुछ पता नहीं,
ये मौसमों सा बदलता है, इसका कोई पता नहीं।
कभी मुस्कुराहटों में छुप जाता है चुपके से,
कभी एक नाम पे ही ठहर जाए — वजह पता नहीं।
न समझे ये फ़ासले, न माने ये दलीलें,
ये बस धड़कता है उसके लिए… क्यों, ये भी पता नहीं।