ज़रा मुस्कुराकर देखना, दुनिया की सबसे पुरानी कहानी है…
कोई प्यार में पागल है, कोई पैसे का दीवाना,
कोई दुनिया को सुधार रहा, कोई खुद से ही बेगाना।
कोई कहता है, “भाई, तेरे लिए जान भी हाज़िर है!”
मुसीबत में फ़ोन लगाओ तो जवाब आता है “अभी थोड़ा बिज़ी हूँ यार!”
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
बस बातों में दुनिया बड़ी है।
कोई दूसरों की थाली देखकर अपना निवाला छोड़ता नहीं,
कोई पड़ोसी की तरक्की देखकर रातों को सोता नहीं।
किसी को कुर्सी प्यारी है, किसी को कुर्सी वाला,
कोई सच का ठेकेदार है, मगर सच से बचने वाला!
कोई स्टेटस में लिखता है, “इंसानियत ज़िंदा रहनी चाहिए,”
घर में काम करने वाले को भी तो इज़्ज़त मिलनी चाहिए!
दुनिया भर के दुखों पर लंबा भाषण देता है,
घर में कोई सवाल पूछ ले, तो कहता है, “मेरा सिर मत खा!”
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
हर चेहरे के पीछे एक अलग घड़ी है।
वक़्त दूसरों का हो तो सलाह हज़ार,
अपना वक़्त आए तो बहाने तैयार!
कोई जवानी में बुढ़ापे की तैयारी करता है,
कोई बुढ़ापे में जवानी को याद करता है।
कोई आज को कल के लिए कुर्बान कर रहा है,
कोई कल की चिंता में आज से परेशान है।
जिस खुशी को पाने में आधी उम्र निकल गई,
उसे जीने की फ़ुर्सत ही कहाँ मिली?
कोई चाहता है कि सब उसकी इज़्ज़त करें,
मगर वह किसी की इज़्ज़त करना ज़रूरी नहीं समझता।
हर किसी को चाहिए कि कोई उसे समझे,
मगर किसी दूसरे को समझने के लिए कौन ठहरता?
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
किसी की छोटी, किसी की बड़ी है।
कोई दुनिया की नज़रों में जीत रहा है,
कोई अपनी ही नज़रों से गिर रहा है।
और कमाल देखो इस ज़माने का
हर कोई दूसरों को आईना दिखा रहा है,
अपने चेहरे से धूल हटाने का वक़्त
किसी के पास नहीं है!
कोई प्यार में पागल है, कोई पैसे का दीवाना,
कोई दुनिया को सुधार रहा, कोई खुद से ही बेगाना।
कोई कहता है, “भाई, तेरे लिए जान भी हाज़िर है!”
मुसीबत में फ़ोन लगाओ तो जवाब आता है “अभी थोड़ा बिज़ी हूँ यार!”
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
बस बातों में दुनिया बड़ी है।
कोई दूसरों की थाली देखकर अपना निवाला छोड़ता नहीं,
कोई पड़ोसी की तरक्की देखकर रातों को सोता नहीं।
किसी को कुर्सी प्यारी है, किसी को कुर्सी वाला,
कोई सच का ठेकेदार है, मगर सच से बचने वाला!
कोई स्टेटस में लिखता है, “इंसानियत ज़िंदा रहनी चाहिए,”
घर में काम करने वाले को भी तो इज़्ज़त मिलनी चाहिए!
दुनिया भर के दुखों पर लंबा भाषण देता है,
घर में कोई सवाल पूछ ले, तो कहता है, “मेरा सिर मत खा!”
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
हर चेहरे के पीछे एक अलग घड़ी है।
वक़्त दूसरों का हो तो सलाह हज़ार,
अपना वक़्त आए तो बहाने तैयार!
कोई जवानी में बुढ़ापे की तैयारी करता है,
कोई बुढ़ापे में जवानी को याद करता है।
कोई आज को कल के लिए कुर्बान कर रहा है,
कोई कल की चिंता में आज से परेशान है।
जिस खुशी को पाने में आधी उम्र निकल गई,
उसे जीने की फ़ुर्सत ही कहाँ मिली?
कोई चाहता है कि सब उसकी इज़्ज़त करें,
मगर वह किसी की इज़्ज़त करना ज़रूरी नहीं समझता।
हर किसी को चाहिए कि कोई उसे समझे,
मगर किसी दूसरे को समझने के लिए कौन ठहरता?
सबको अपनी-अपनी पड़ी है,
किसी की छोटी, किसी की बड़ी है।
कोई दुनिया की नज़रों में जीत रहा है,
कोई अपनी ही नज़रों से गिर रहा है।
और कमाल देखो इस ज़माने का
हर कोई दूसरों को आईना दिखा रहा है,
अपने चेहरे से धूल हटाने का वक़्त
किसी के पास नहीं है!

