ये मैं हूं या कोई और है
जो साँस ले रहा है देह के भीतर
जो दिख रहा है
मेरा ही होना है या बीत रहा है
कोई और समय की गति में।
ये विचार, कल्पनाएं, स्वप्न
ये सब मेरे ही हैं
या मैंने जिया है अक्सर
किसी और का सोचा,
किसी और का कहा,
किसी और का ख़्वाब।
ये प्रश्न कि
ये मैं ही हूं या नहीं
भी मेरा है कि नहीं
या पूछा है ये कइयों ने
कई कई बार
इसका जवाब भी जो होगा
वो कितनी बार कितनों ने दे दिया होगा
मेरा कुछ भी तो नहीं है
मैं क्या बस इस देह को अपना कह दूं
तो मैं हूं?
मैं हूं भी या
मैं हूं भी नहीं!

जो साँस ले रहा है देह के भीतर
जो दिख रहा है
मेरा ही होना है या बीत रहा है
कोई और समय की गति में।
ये विचार, कल्पनाएं, स्वप्न
ये सब मेरे ही हैं
या मैंने जिया है अक्सर
किसी और का सोचा,
किसी और का कहा,
किसी और का ख़्वाब।
ये प्रश्न कि
ये मैं ही हूं या नहीं
भी मेरा है कि नहीं
या पूछा है ये कइयों ने
कई कई बार
इसका जवाब भी जो होगा
वो कितनी बार कितनों ने दे दिया होगा
मेरा कुछ भी तो नहीं है
मैं क्या बस इस देह को अपना कह दूं
तो मैं हूं?
मैं हूं भी या
मैं हूं भी नहीं!
