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मेरी शाखों पे मेरे सब्र का फल देखेंगे ,,

sameerkh1

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मेरी शाखों पे मेरे सब्र का फल देखेंगे
जब मेरे यार मेरा रंग-ए-ग़ज़ल देखेंगे ,,
मैं भी हर रोज़ मुलाक़ात का कहता था उसे
वो भी हर रोज़ ये कहता था के कल देखेंगे,,,
 
मेरी शाखों पे मेरे सब्र का फल देखेंगे
जब मेरे यार मेरा रंग-ए-ग़ज़ल देखेंगे ,,
मैं भी हर रोज़ मुलाक़ात का कहता था उसे
वो भी हर रोज़ ये कहता था के कल देखेंगे,,,
Khubsurati se likha apne..
 
Jee shukriya sun ke dil ko tasalli mili ...
गौर फरमाएगा तसल्ली के 4 शब्दों पे मेरे ,,

"दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं |
 
मेरी शाखों पे मेरे सब्र का फल देखेंगे
जब मेरे यार मेरा रंग-ए-ग़ज़ल देखेंगे ,,
मैं भी हर रोज़ मुलाक़ात का कहता था उसे
वो भी हर रोज़ ये कहता था के कल देखेंगे,,,
गाहे बगाहे की मुलाकात ही अच्छी है जनाब
कद्र खो देता है हर रोज का आना जाना
 
गौर फरमाएगा तसल्ली के 4 शब्दों पे मेरे ,,

"दो शब्द तसल्ली के नहीं मिलते इस शहर में,
लोग दिल में भी दिमाग लिए घूमते हैं |
तसल्ली से पढ़ा होता तो समझ में आ जाते "वो"
कुछ पन्ने- बिन पढ़े ही शायद पलट दिए होंगे तुमने
 
Chalo phir aaj ye BHI faisle kar hi dete he
Kaun he jisse ham aap ki dill ki BAAT Keh dete he :yawn:
ज़ाहिर कर दो जज़्बात अपने दिल -ए-नादान के,
मन की बात बोलने में वक़्त लगाया नहीं करते !

ख़ामखाँ ही परेशान हो जाएगा कोई भी शख्स,
हर किसी को दास्तां-ए-दिल सुनाया नहीं करते ,,
 
तसल्ली से पढ़ा होता तो समझ में आ जाते "वो"
कुछ पन्ने- बिन पढ़े ही शायद पलट दिए होंगे तुमने
जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
 
जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ
जिंदगी को किताबों से जोड़ा ही कहा
तुमने शायद ठीक से जाना ही नहीं....
जो पन्ने ना पढ़ पाए वो किताबों के
ना होकर, उसकी जिंदगी के थे...

अगर पढ़ पाते तुम उसे तो शायद शिकायत न होती
साथ होते और उसके होठों पे उसके मुस्कुराहट होती
 
जिंदगी को किताबों से जोड़ा ही कहा
तुमने शायद ठीक से जाना ही नहीं....
जो पन्ने ना पढ़ पाए वो किताबों के
ना होकर, उसकी जिंदगी के थे...

अगर पढ़ पाते तुम उसे तो शायद शिकायत न होती
साथ होते और उसके होठों पे उसके मुस्कुराहट होती
खुद ही को पढ़ता हूँ,
फिर यूं ही छोड़ देता हूँ…
एक पन्ना जिंदगी का,
मैं हर रोज मोड़ देता हूँ!
 
खुद ही को पढ़ता हूँ,
फिर यूं ही छोड़ देता हूँ…
एक पन्ना जिंदगी का,
मैं हर रोज मोड़ देता हूँ!
खुद के पन्नों को पढ़ना लाजिमी है
पर उसका क्या जो तुम्हारे इंतजार में है
ना पढ़ पाओगे उसे तो खो दोगे
दुख तो उसे भी होगा लेकिन तुम........
 
Mithas char sakte he log apni baato se
Jawab mil Jayega ek Baar
Khud hi puchlena apni saso se
Kasme wade sayad mita sake par
Mita nai sakte lakir apni hato se

Bin kahe bin sune Jane kaise ham
Aap ki koi dasta he ya nai ye maane kaise
:Dtm:
इस दिल की दास्तां सुनाए कैसे,
इस दिल का हाल तुम्हें बताएं कैसे,,

ये दिल प्यार चाहता है,
पर प्यार इसे करता नहीं कोई।
इस दिल को सुकून चाहिए,
पर तकलीफ देता है हर कोई।
 
खुद के पन्नों को पढ़ना लाजिमी है
पर उसका क्या जो तुम्हारे इंतजार में है
ना पढ़ पाओगे उसे तो खो दोगे
दुख तो उसे भी होगा लेकिन तुम........
खुद को खो दिया अपनों को पाते-पाते
उम्र बीत गई सबको यकीं दिलाते-दिलाते।
एक सफ़र की शुरुआत की,
खुशियों का आगाज़ किया,
मगर निशान मिट गए राहों के,
मंज़िल पर आते-आते,,
 
खुद को खो दिया अपनों को पाते-पाते
उम्र बीत गई सबको यकीं दिलाते-दिलाते।
एक सफ़र की शुरुआत की,
खुशियों का आगाज़ किया,
मगर निशान मिट गए राहों के,
मंज़िल पर आते-आते,,
तो अब समय है खुद को पाने का
यकीन दिलाने की अब जरूरत नहीं
खुशियों का आगाज फिर से करो
मंजिलों की परवाह किए बगैर
नए रास्ते बनाओ, सफर शुरू करो
हमसफर खुद ब खुद बन जायेंगे...
 
तो अब समय है खुद को पाने का
यकीन दिलाने की अब जरूरत नहीं
खुशियों का आगाज फिर से करो
मंजिलों की परवाह किए बगैर
नए रास्ते बनाओ, सफर शुरू करो
हमसफर खुद ब खुद बन जायेंगे...
ज़िंदगी यूं हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा
 
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