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Rockzz✨❤️श्वेतराग❤️
Guest
मेरे भीतर कुछ घट रहा है,
पर मुझे स्वयं नहीं पता
वह क्या है।
न कोई स्पष्ट दुःख है,
न कोई ऐसी खुशी जिसे
पकड़कर मुस्कुरा सकूँ।
बस मन के किसी कोने में
एक अनाम-सी हलचल है,
जैसे शांत समुद्र के नीचे
कोई सैलाब पल रहा हो।
कभी लगता है
कोई तूफ़ान आने वाला है,
कभी लगता है
तूफ़ान आकर गुजर भी चुका है।
कभी बिना कारण
मन भारी हो जाता है,
और कभी सब ठीक होते हुए भी
कुछ ठीक नहीं लगता।
मैं अपने ही भीतर
कुछ खोजता रहता हूँ
पर हाथ में सिर्फ
अपनी ही बेचैनी आती है।
काश कोई पूछने के बजाय
मेरे भीतर उतर पाता,
शायद उसे पता चल जाता
मैं परेशान किस बात से हूँ,
जबकि मुझे स्वयं नहीं पता।
पर मुझे स्वयं नहीं पता
वह क्या है।
न कोई स्पष्ट दुःख है,
न कोई ऐसी खुशी जिसे
पकड़कर मुस्कुरा सकूँ।
बस मन के किसी कोने में
एक अनाम-सी हलचल है,
जैसे शांत समुद्र के नीचे
कोई सैलाब पल रहा हो।
कभी लगता है
कोई तूफ़ान आने वाला है,
कभी लगता है
तूफ़ान आकर गुजर भी चुका है।
कभी बिना कारण
मन भारी हो जाता है,
और कभी सब ठीक होते हुए भी
कुछ ठीक नहीं लगता।
मैं अपने ही भीतर
कुछ खोजता रहता हूँ
पर हाथ में सिर्फ
अपनी ही बेचैनी आती है।
काश कोई पूछने के बजाय
मेरे भीतर उतर पाता,
शायद उसे पता चल जाता
मैं परेशान किस बात से हूँ,
जबकि मुझे स्वयं नहीं पता।