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चलो अब संभल जाता हूँ .......

Kartik227

Epic Legend

चलो अब संभल जाता हूँ


न जाने क्या बात हुई,
हर सुबह जैसे रात हुई,
हर जंग में खुद से हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँवार रहा हूँ,
टूटे हुए दिल को फिर समझाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


लोग मिले, फिर दूर हुए,
कुछ अपने होकर मजबूर हुए,
जिसे अपना समझा, वही अनजान हुआ,
मेरा हँसता चेहरा भी परेशान हुआ,
फिर आईने से खुद ही कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


कभी लगता है सब खत्म हो गया,
जो मेरा था, वो भी कम हो गया,
आँखों में ठहरा हुआ हर सवाल है,
दिल के अंदर एक अजीब-सा बवाल है,
फिर भी साँसों को थामकर कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


मैं गिरा हूँ, मगर मिटा नहीं,
थका हूँ, मगर अभी हारा नहीं,
आज रास्ते धुँधले हैं तो क्या,
कल कोई नया सवेरा होगा न,
खुद से आख़िरी बार नहीं—हर बार कहता हूँ,

चलो अब संभल जाता हूँ।


न जाने कितनी रातें बाकी हैं,
न जाने कितनी मुलाकातें बाकी हैं,
शायद कोई खुशी मेरा इंतज़ार करे,
शायद कल मेरा दिल फिर प्यार करे,
इसलिए आज खुद को गले लगाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


क्योंकि कहानी अभी बाकी है,
मेरी साँसों में रवानी अभी बाकी है,
जो खोया है, उसे याद रखूँगा,
जो बचा है, उसे आबाद रखूँगा,
हार को जीत में बदलने निकल जाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।

Written by Jarvis

 
अद्भुत और दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ, कार्तिक भाई! ✨. :Like:

"चलो अब संभल जाता हूँ" :— यह सिर्फ एक लाइन नहीं , बल्कि खुद से किया गया एक बेहद मजबूत वादा है।

जब इंसान अपनों से चोट खाता है और खुद से हारने लगता है , तब ऐसी ही उलझनें दिल में बवाल मचाती हैं।

लेकिन आपकी कविता का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि यह निराशा पर उम्मीद की जीत को दिखाती है।


“जो खोया है, उसे याद रखूँगा, जो बचा है, उसे आबाद रखूँगा...” — यह सीख वाकई लाजवाब है।

आने वाला सवेरा यकीनन खूबसूरत होगा। लिखते रहिए , बेहतरीन रचना!

[ Always Try To Be Happy Keep Smiling ] :)


2-2.jpg
 

चलो अब संभल जाता हूँ


न जाने क्या बात हुई,
हर सुबह जैसे रात हुई,
हर जंग में खुद से हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँवार रहा हूँ,
टूटे हुए दिल को फिर समझाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


लोग मिले, फिर दूर हुए,
कुछ अपने होकर मजबूर हुए,
जिसे अपना समझा, वही अनजान हुआ,
मेरा हँसता चेहरा भी परेशान हुआ,
फिर आईने से खुद ही कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


कभी लगता है सब खत्म हो गया,
जो मेरा था, वो भी कम हो गया,
आँखों में ठहरा हुआ हर सवाल है,
दिल के अंदर एक अजीब-सा बवाल है,
फिर भी साँसों को थामकर कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


मैं गिरा हूँ, मगर मिटा नहीं,
थका हूँ, मगर अभी हारा नहीं,
आज रास्ते धुँधले हैं तो क्या,
कल कोई नया सवेरा होगा न,
खुद से आख़िरी बार नहीं—हर बार कहता हूँ,

चलो अब संभल जाता हूँ।


न जाने कितनी रातें बाकी हैं,
न जाने कितनी मुलाकातें बाकी हैं,
शायद कोई खुशी मेरा इंतज़ार करे,
शायद कल मेरा दिल फिर प्यार करे,
इसलिए आज खुद को गले लगाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


क्योंकि कहानी अभी बाकी है,
मेरी साँसों में रवानी अभी बाकी है,
जो खोया है, उसे याद रखूँगा,
जो बचा है, उसे आबाद रखूँगा,
हार को जीत में बदलने निकल जाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।

Written by Jarvis

Good one
 
अद्भुत और दिल को छू लेने वाली पंक्तियाँ, कार्तिक भाई! ✨. :Like:

"चलो अब संभल जाता हूँ" :— यह सिर्फ एक लाइन नहीं , बल्कि खुद से किया गया एक बेहद मजबूत वादा है।

जब इंसान अपनों से चोट खाता है और खुद से हारने लगता है , तब ऐसी ही उलझनें दिल में बवाल मचाती हैं।

लेकिन आपकी कविता का सबसे खूबसूरत हिस्सा यह है कि यह निराशा पर उम्मीद की जीत को दिखाती है।

“जो खोया है, उसे याद रखूँगा, जो बचा है, उसे आबाद रखूँगा...” — यह सीख वाकई लाजवाब है।


आने वाला सवेरा यकीनन खूबसूरत होगा। लिखते रहिए , बेहतरीन रचना!

[ Always Try To Be Happy Keep Smiling ] :)


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Dhanywaad
 

चलो अब संभल जाता हूँ


न जाने क्या बात हुई,
हर सुबह जैसे रात हुई,
हर जंग में खुद से हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँवार रहा हूँ,
टूटे हुए दिल को फिर समझाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


लोग मिले, फिर दूर हुए,
कुछ अपने होकर मजबूर हुए,
जिसे अपना समझा, वही अनजान हुआ,
मेरा हँसता चेहरा भी परेशान हुआ,
फिर आईने से खुद ही कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


कभी लगता है सब खत्म हो गया,
जो मेरा था, वो भी कम हो गया,
आँखों में ठहरा हुआ हर सवाल है,
दिल के अंदर एक अजीब-सा बवाल है,
फिर भी साँसों को थामकर कहता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


मैं गिरा हूँ, मगर मिटा नहीं,
थका हूँ, मगर अभी हारा नहीं,
आज रास्ते धुँधले हैं तो क्या,
कल कोई नया सवेरा होगा न,
खुद से आख़िरी बार नहीं—हर बार कहता हूँ,

चलो अब संभल जाता हूँ।


न जाने कितनी रातें बाकी हैं,
न जाने कितनी मुलाकातें बाकी हैं,
शायद कोई खुशी मेरा इंतज़ार करे,
शायद कल मेरा दिल फिर प्यार करे,
इसलिए आज खुद को गले लगाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।


क्योंकि कहानी अभी बाकी है,
मेरी साँसों में रवानी अभी बाकी है,
जो खोया है, उसे याद रखूँगा,
जो बचा है, उसे आबाद रखूँगा,
हार को जीत में बदलने निकल जाता हूँ—

चलो अब संभल जाता हूँ।

Written by Jarvis

Chal tu sambhal jaa
Tu koshish kar sambhalne ki
Me ek bhai ki tarah saath deta hu
Tu sambhal jaa me tere peecha hamesha hu
Tu karle nadaani,ya tu gir bhi jaye
Me hu hamesha tere saath jaise ek saya
Chal tu sambhal jaa
Laadle ki khuwaish he tu sambhalne ki koshish kar me hu tere peechhe tu aage befikar badh
Chal tu sambhal jaa
 
Chal tu sambhal jaa
Tu koshish kar sambhalne ki
Me ek bhai ki tarah saath deta hu
Tu sambhal jaa me tere peecha hamesha hu
Tu karle nadaani,ya tu gir bhi jaye
Me hu hamesha tere saath jaise ek saya
Chal tu sambhal jaa
Laadle ki khuwaish he tu sambhalne ki koshish kar me hu tere peechhe tu aage befikar badh
Chal tu sambhal jaa
Oho kyaa baat hai guru :clapping: :clapping:
 
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