COFFEE☕
Favoured Frenzy
Aaahhhaaaaaaannnnn!!!!Aha!! You don't know......... ???![]()
Aaahhhaaaaaaannnnn!!!!Aha!! You don't know......... ???![]()
After a long time....अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल तो देखो
आँखें देखो, रंग देखो, बाल देखो...
उसने पहन ली नाक में बाली
मर जाओगे जरा उसकी चाल देखो
देखने वालों तुम क्या देखते हो
तुम तो मेरा हाल देखो...
अप्सरा पता नहीं कहाँ गई
पता नहीं किसके साथ है...
नूर-नूर खुशबू-खुशबू
सब घर ही होना था मेरे
मैंने इतना उसे ढूँढा
अगर मैं ढूंढती खुदा को
खुदा घर ही होना था मेरे...
और ढूँढते-ढूँढते चली गयी मैं
एक चर्च के अंदर
चर्च के अंदर जाकर
जलाईं मोमबत्तियाँ
क्या बताऊँ मैं कितनी
काम आईं मोमबत्तियाँ...
मोमबत्तियों के धुएँ में से
दुआ दिखी मुझे
चर्च का दरवाजा खुला
अप्सरा दिखी मुझे...
आई वो हवा बनकर
मेरे लिए वो यार दवा बनकर
तेरे लिए मैं क्या, पता ही नहीं
मेरी गयी थी तू ख़ुदा बनकर...
इतनी फरियाद करके मिली है
3 सालों के बाद मिली है
मिली है पर इस तरह
जैसे ख़ुदा से दाद मिली है...
वो चंद्रमा, वो ज़मीन, वो बादल हो गई
वो मुझे देखकर खुश नहीं हुई
वो मुझे देखकर पागल हो गई...
आँखें चूमे, सीने से लगाए
पता नहीं क्या-क्या करती जाए
मेरे सिर से वार कर कुछ तो
दुआ मेरे लिए पढ़ती जाए...
और नदियों तक, नहरों तक
दुआओं तक, ख़ैरियत तक
वो मेरी, मैं उसकी
सिर से लेकर पैरों तक...
कितना किया सब्र था
दिन, महीने, साल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...
वो तेरा जाना मुझे खा गया
अब साँस आई की तू आ गया
जलती पर घी क्यों पड़ता है
उसको छूने का मन क्यों करता है...
यह बात मेरी समझ नहीं आई
वो मिले तो बारिश क्यों होती है
इतना सजती जाती थी
कितना सजती जाती थी...
आओ अगले शेर में बताऊँ
वो कैसी लगती जाती थी..
अमृता प्रीतम की कविता
शायरी जॉन जनाब की
मोहम्मद रफ़ी की ग़ज़ल है वो
कव्वाली नुसरत साहब की...
मुझे मेरा शेर सुनाने लगी है
पहली बार
वो मेरे आगे गाने लगी है
पहली बार
तेरा वो तेरा वो ख़याल था
ना होकर भी तू मेरे साथ था...
जाते-जाते मैंने
तेरे हाथ चूमे नहीं
मुझे आज तक यह मलाल था
आशिकों, पागलो फिर एक और सुनाऊँ
सुनो शेर एक और सुनाऊँ
कि तिनके पर देखो लाख रख आई
मुझे हवा के ऊपर उठाकर रख आई...
मैंने कहा जल्दी-जल्दी कोई तस्वीर खींचो
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा है
और पहली बार यार हमारी तक़दीर नहीं थी
हथेलियों पर प्यार की लकीर नहीं थी
जो आँखों के अंदर खींची थी बस वही थी
उसकी मेरी कोई भी तस्वीर नहीं थी
वो फकीर नहीं थी
जो हमें पहली बार मिली थी
मैं दोबारा मिली उसको
वो फकीर नहीं थी
थी वो भी मारी मोहब्बत की
ऐसे ही नाकाबिल नहीं हुआ
उसको भी उसका यार नहीं मिला
इसी वजह से पागल हुई
मुझे भी अप्सरा नहीं मिलेगी..
आया क्या ख़याल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो...
उसके शहर में कोई कमाल तो है
बेसुरों में ताल तो है
क्या हुआ अगर वो मेरी नहीं
वो मेरे साथ तो है..
सवाल तो हैं, सवाल इतने कि डर के अंदर आएँ
मुझे लगा जन्नत आ गई
फिर देखा उसके घर के अंदर आएँ
उसके घर के अंदर चार क़दम पर
लटकी देखी दीवारों पर प्यार की तस्वीरें
और चाँद भी एक तरफ़, तारे एक तरफ़
ज़िंदगी के नज़ारे एक तरफ़
उसके घर में से तस्वीरें मेरी
एक नहीं चारों तरफ़
मैंने एक और देखी तस्वीर
मुझे मारा उस तस्वीर ने
ढूँढ लिया है राँझा
राँझा मेरी हीर ने
पहले वो तस्वीर देखो
और आँखें मेरी लाल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...
मुझे उसकी, तुम्हें उसकी
क्यों ख़ुमारी है देख लो
जिसने देखना है अप्सरा को
यह आख़िरी बार है देख लो
सफ़ेद-सफ़ेद आँखों को
लाल करके पूछा उसने
मेरी जान ने जो पूछा
कमाल पूछा उसने
मैंने सोचा नहीं था पूछेगी
यह सवाल पूछा उसने
मुझसे मेरे बच्चे का हाल पूछा उसने
उसका हौसला देखो, उसका सवाल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...!!!
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल तो देखो
आँखें देखो, रंग देखो, बाल देखो...
उसने पहन ली नाक में बाली
मर जाओगे जरा उसकी चाल देखो
देखने वालों तुम क्या देखते हो
तुम तो मेरा हाल देखो...
अप्सरा पता नहीं कहाँ गई
पता नहीं किसके साथ है...
नूर-नूर खुशबू-खुशबू
सब घर ही होना था मेरे
मैंने इतना उसे ढूँढा
अगर मैं ढूंढती खुदा को
खुदा घर ही होना था मेरे...
और ढूँढते-ढूँढते चली गयी मैं
एक चर्च के अंदर
चर्च के अंदर जाकर
जलाईं मोमबत्तियाँ
क्या बताऊँ मैं कितनी
काम आईं मोमबत्तियाँ...
मोमबत्तियों के धुएँ में से
दुआ दिखी मुझे
चर्च का दरवाजा खुला
अप्सरा दिखी मुझे...
आई वो हवा बनकर
मेरे लिए वो यार दवा बनकर
तेरे लिए मैं क्या, पता ही नहीं
मेरी गयी थी तू ख़ुदा बनकर...
इतनी फरियाद करके मिली है
3 सालों के बाद मिली है
मिली है पर इस तरह
जैसे ख़ुदा से दाद मिली है...
वो चंद्रमा, वो ज़मीन, वो बादल हो गई
वो मुझे देखकर खुश नहीं हुई
वो मुझे देखकर पागल हो गई...
आँखें चूमे, सीने से लगाए
पता नहीं क्या-क्या करती जाए
मेरे सिर से वार कर कुछ तो
दुआ मेरे लिए पढ़ती जाए...
और नदियों तक, नहरों तक
दुआओं तक, ख़ैरियत तक
वो मेरी, मैं उसकी
सिर से लेकर पैरों तक...
कितना किया सब्र था
दिन, महीने, साल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...
वो तेरा जाना मुझे खा गया
अब साँस आई की तू आ गया
जलती पर घी क्यों पड़ता है
उसको छूने का मन क्यों करता है...
यह बात मेरी समझ नहीं आई
वो मिले तो बारिश क्यों होती है
इतना सजती जाती थी
कितना सजती जाती थी...
आओ अगले शेर में बताऊँ
वो कैसी लगती जाती थी..
अमृता प्रीतम की कविता
शायरी जॉन जनाब की
मोहम्मद रफ़ी की ग़ज़ल है वो
कव्वाली नुसरत साहब की...
मुझे मेरा शेर सुनाने लगी है
पहली बार
वो मेरे आगे गाने लगी है
पहली बार
तेरा वो तेरा वो ख़याल था
ना होकर भी तू मेरे साथ था...
जाते-जाते मैंने
तेरे हाथ चूमे नहीं
मुझे आज तक यह मलाल था
आशिकों, पागलो फिर एक और सुनाऊँ
सुनो शेर एक और सुनाऊँ
कि तिनके पर देखो लाख रख आई
मुझे हवा के ऊपर उठाकर रख आई...
मैंने कहा जल्दी-जल्दी कोई तस्वीर खींचो
उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा है
और पहली बार यार हमारी तक़दीर नहीं थी
हथेलियों पर प्यार की लकीर नहीं थी
जो आँखों के अंदर खींची थी बस वही थी
उसकी मेरी कोई भी तस्वीर नहीं थी
वो फकीर नहीं थी
जो हमें पहली बार मिली थी
मैं दोबारा मिली उसको
वो फकीर नहीं थी
थी वो भी मारी मोहब्बत की
ऐसे ही नाकाबिल नहीं हुआ
उसको भी उसका यार नहीं मिला
इसी वजह से पागल हुई
मुझे भी अप्सरा नहीं मिलेगी..
आया क्या ख़याल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो...
उसके शहर में कोई कमाल तो है
बेसुरों में ताल तो है
क्या हुआ अगर वो मेरी नहीं
वो मेरे साथ तो है..
सवाल तो हैं, सवाल इतने कि डर के अंदर आएँ
मुझे लगा जन्नत आ गई
फिर देखा उसके घर के अंदर आएँ
उसके घर के अंदर चार क़दम पर
लटकी देखी दीवारों पर प्यार की तस्वीरें
और चाँद भी एक तरफ़, तारे एक तरफ़
ज़िंदगी के नज़ारे एक तरफ़
उसके घर में से तस्वीरें मेरी
एक नहीं चारों तरफ़
मैंने एक और देखी तस्वीर
मुझे मारा उस तस्वीर ने
ढूँढ लिया है राँझा
राँझा मेरी हीर ने
पहले वो तस्वीर देखो
और आँखें मेरी लाल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...
मुझे उसकी, तुम्हें उसकी
क्यों ख़ुमारी है देख लो
जिसने देखना है अप्सरा को
यह आख़िरी बार है देख लो
सफ़ेद-सफ़ेद आँखों को
लाल करके पूछा उसने
मेरी जान ने जो पूछा
कमाल पूछा उसने
मैंने सोचा नहीं था पूछेगी
यह सवाल पूछा उसने
मुझसे मेरे बच्चे का हाल पूछा उसने
उसका हौसला देखो, उसका सवाल देखो
अप्सरा हो गई और भी गोरी
अप्सरा के कमाल देखो
आँखें देखो रंग देखो बाल देखो...!!!

achaaa ji aesa kyaaa.. mujhe to shayd khuda ne hi bnayaWow. Aate hi kamal karna suru kar diya.
ये सिर्फ़ कविता नहीं, मोहब्बत, बिछड़ने और फिर मिल जाने की पूरी दास्तान है I हर शेर में दर्द भी है और रूह की गर्माहट भी।
आख़िरी सवाल “मेरे बच्चे का हाल पूछा उसने” पूरी कहानी को एक झटके में और भी गहरा कर देता है।
Omg, wo hi innocence, wo hi pyar, wo hi dard , wo hi kabiliyat.
Tareef kre kya uski , jisne tuje bnaya.![]()

Shukria jiAfter a long time....
वही पुराने अंदाज,... आये हाय लाजवाब
˚⊱❀✿❁♡❁✿❀⊰˚
Wo to hme bhi pta hai Khuda ne bnayaa aapko , lekin waqt dusro se jyada liya hai , wo pakka. Khuda is bias with you .achaaa ji aesa kyaaa.. mujhe to shayd khuda ne hi bnaya![]()
heheheh! ho bhi skta hai.. abhi to apsra ka nxt milan bhi post kar dia mene...Wo to hme bhi pta hai Khuda ne bnayaa aapko , lekin waqt dusro se jyada liya hai , wo pakka. Khuda is bias with you .![]()
Glad you agreed. Bas ab usi ki taraf prayan hai . Thodi der me aap hmara abhipray dekhogi.heheheh! ho bhi skta hai.. abhi to apsra ka nxt milan bhi post kar dia mene...

Achaa shuddh vaartalaap aap kabse karne lgeGlad you agreed. Bas ab usi ki taraf prayan hai . Thodi der me aap hmara abhipray dekhogi.![]()
Atleast thodi to asar aayegi n jiski compny me bhle thoda time hi shi , rahoge.Achaa shuddh vaartalaap aap kabse karne lge![]()

Atleast thodi to asar aayegi n jiski compny me bhle thoda time hi shi , rahoge.![]()

achaaa ji chalo iss baat ko maan leti hu.. ki kuch asar to ho rha mera Sirf man n lo, aisa kuch kro ki asar jyada ho. Ho ske to thoda jyada waqt hme de diya kro.achaaa ji chalo iss baat ko maan leti hu.. ki kuch asar to ho rha mera
![]()

Mera jyda waqt kahin aapke liye nuksaan dayak naa ho jaayeSirf man n lo, aisa kuch kro ki asar jyada ho. Ho ske to thoda jyada waqt hme de diya kro.![]()
Kash aisa nuksan ki kitni ahemiyat hai muje aapko kya pta. Its kind of blessings in dusguise. Hone do jitna nuksan hona hai . Ab Diary ka promise to already kab ke kiya hua pending chal rha hai ab ye doosra promise kar diya aapne , jyada waqt dene ka. But dont worry . I have lots of patience when its about getting diamonds , pearls and gems .Mera jyda waqt kahin aapke liye nuksaan dayak naa ho jaaye![]()

Der nahi lgaaige abki baar...Kash aisa nuksan ki kitni ahemiyat hai muje aapko kya pta. Its kind of blessings in dusguise. Hone do jitna nuksan hona hai . Ab Diary ka promise to already kab ke kiya hua pending chal rha hai ab ye doosra promise kar diya aapne , jyada waqt dene ka. But dont worry . I have lots of patience when its about getting diamonds , pearls and gems .![]()

I know Khuda ke ghar der hai andher ni . Aur ab to der bhi ni honewali . Sone pe suhaga. Lagta hai uparwala hum pe kuch jyada hi mherban ho gya hai.Der nahi lgaaige abki baar...![]()
