मै भी कभी जवान था,
"बिल्कुल आपकी तरह",
मुझ पर भी लगते थे कभी,
फुल, पत्ते और फल,
जैसे अभी होगी आपके मन में,
लहरें, आकांक्षाएं और तरंग,
"बिल्कुल एक इंसान की तरह",
मेरे पास भी आते थे,
तितलियां, इंसान और कीट पतंग,
"बिल्कुल आपकी तरह",
जब कभी मन भर जाए,
इन मौसमी फूलों, पत्तों और फलों से,
जब...