ये तो एक तरफा लगा हमे...... दिल कि हलचलकोई दस्तक नहीं थी, कोई आहट नहीं थी,
फिर भी दिल में किसी बात की हलचल थी।
न कोई चेहरा मुकम्मल, न कोई ख़्वाब बुना,
बस ख़ामोशी में कुछ अलग-सी पहल थी।

ये तो कहानी की शुरुवात हैये तो एक तरफा लगा हमे...... दिल कि हलचल
अर्ज क्या हे
चुपके सी दिल सोर करने लगा हैं
मेरा दिल मुझ को हि छल्ने लगा हैं
आजकल क्या हो रहा हैं मुझ को
यु बेवाज ये दिल मचल्ने लगा हैं
Very trueNot every feeling needs a reason to exist![]()
ye kahaniya chalta rahe har pal hardin suruwat hi ho ant mi aur na chaleये तो कहानी की शुरुवात है
बहोत खूब लिखा आपने
