MrDreamy
Favoured Frenzy
वह अपनी बात कहकर चुप हो गया। शायद मन में कई सवाल थे, और कहीं एक छोटी-सी उम्मीद भी कि सामने से कुछ ऐसा सुनने को मिले, जो उसके एहसासों को एक नई दिशा दे सके। वह कुछ पल रुकी। फिर बिना किसी घबराहट या बनावटी संकोच के, सहजता से अपनी बात कहने लगी। चेहरे पर वही शांति, आवाज़ में वही नरमी। उसने अपनी परिस्थितियाँ समझाईं, अपनी स्थिति स्पष्ट की और बड़े सलीके से बता दिया कि वह इस रिश्ते को उस नज़र से नहीं देखती। न कोई कठोर शब्द, न कोई झूठी तसल्ली—बस अपनी बात को ईमानदारी से रखने का एक सादा-सा अंदाज़।
उसके चेहरे पर हल्की-सी उदासी उतर आई, और कुछ पल के लिए उसे समझ नहीं आया कि आगे क्या कहा जाए। जिस बातचीत के बाद शायद बहुत कुछ बदल जाने की उम्मीद थी, वह कुछ शांत शब्दों के साथ वहीं ठहर गई थी। लेकिन दुसरी तरफ से लडकीने सहजता से दोस्ती की बात की—जैसे किसी बंद होते दरवाज़े के पास एक खिड़की खुली रह गई हो। कोई बड़ा वादा नहीं, कोई भविष्य की कहानी नहीं; बस इतना कि दो लोग अच्छी बातचीत और एक सहज रिश्ते को आगे बढ़ा सकते हैं।
उसने भी सहजता से हाँ कह दी, शायद उसे लगा कि हर अच्छी चीज़ का मनचाहा रूप मिलना ज़रूरी नहीं होता। वक़्त बीता, और उस बातचीत की गंभीरता पर हँसी की हल्की परत चढ़ने लगी। कभी किसी पुरानी बात पर चुटकी ली जाती, कभी कोई एक-दूसरे को छेड़ देता। जिस पल में कभी शब्द कम पड़ गए थे, उसी पल का ज़िक्र अब मुस्कुराहट के साथ होने लगा। ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे ही सिखाती है—हर जवाब कहानी ख़त्म नहीं करता। कुछ जवाब सिर्फ़ यह तय करते हैं कि कहानी को आगे किस रूप में बढ़ना है।
शायद सबसे ख़ूबसूरत बात यही है कि दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, फिर भी उनके बीच हँसी, सम्मान और एक सहज रिश्ता अपनी जगह बना सकता है।
P.S. - "Both characters are fictitious, any resemblance with real story is purely coincidental"
उसके चेहरे पर हल्की-सी उदासी उतर आई, और कुछ पल के लिए उसे समझ नहीं आया कि आगे क्या कहा जाए। जिस बातचीत के बाद शायद बहुत कुछ बदल जाने की उम्मीद थी, वह कुछ शांत शब्दों के साथ वहीं ठहर गई थी। लेकिन दुसरी तरफ से लडकीने सहजता से दोस्ती की बात की—जैसे किसी बंद होते दरवाज़े के पास एक खिड़की खुली रह गई हो। कोई बड़ा वादा नहीं, कोई भविष्य की कहानी नहीं; बस इतना कि दो लोग अच्छी बातचीत और एक सहज रिश्ते को आगे बढ़ा सकते हैं।
उसने भी सहजता से हाँ कह दी, शायद उसे लगा कि हर अच्छी चीज़ का मनचाहा रूप मिलना ज़रूरी नहीं होता। वक़्त बीता, और उस बातचीत की गंभीरता पर हँसी की हल्की परत चढ़ने लगी। कभी किसी पुरानी बात पर चुटकी ली जाती, कभी कोई एक-दूसरे को छेड़ देता। जिस पल में कभी शब्द कम पड़ गए थे, उसी पल का ज़िक्र अब मुस्कुराहट के साथ होने लगा। ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे ही सिखाती है—हर जवाब कहानी ख़त्म नहीं करता। कुछ जवाब सिर्फ़ यह तय करते हैं कि कहानी को आगे किस रूप में बढ़ना है।
शायद सबसे ख़ूबसूरत बात यही है कि दो लोगों के विचार अलग हो सकते हैं, फिर भी उनके बीच हँसी, सम्मान और एक सहज रिश्ता अपनी जगह बना सकता है।
P.S. - "Both characters are fictitious, any resemblance with real story is purely coincidental"