आज फिर दिल थोड़ा भारी है...
दर्द हमें भी होता है...
मसला ये है कि
शिकायत किससे करें।
कई बार मन करता है कि किसी से कह दूँ,
"आज ठीक नहीं हूँ..."
लेकिन फिर याद आता है,
हर किसी के पास अपने-अपने बोझ हैं,
कोई आपको सुनेगा नहीं
बल्कि आपके लिए राय कायम करेगा।
शिकायत भी किससे करूँ...
जिनसे उम्मीद थी,
वो समझ नहीं पाए।
शायद कुछ दर्द ऐसे ही होते हैं,
जो आँसुओं से नहीं,
खामोशी से बहते हैं।
चलो...
आज फिर सब ठीक होने का
नाटक कर लेते हैं।

दर्द हमें भी होता है...
मसला ये है कि
शिकायत किससे करें।
कई बार मन करता है कि किसी से कह दूँ,
"आज ठीक नहीं हूँ..."
लेकिन फिर याद आता है,
हर किसी के पास अपने-अपने बोझ हैं,
कोई आपको सुनेगा नहीं
बल्कि आपके लिए राय कायम करेगा।
शिकायत भी किससे करूँ...
जिनसे उम्मीद थी,
वो समझ नहीं पाए।
शायद कुछ दर्द ऐसे ही होते हैं,
जो आँसुओं से नहीं,
खामोशी से बहते हैं।
चलो...
आज फिर सब ठीक होने का
नाटक कर लेते हैं।
