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शौर्य की हुंकार...!!!

CuteBubble

ₘₑₗₒdᵢₒᵤₛ ₛₒᵤₗ
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थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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Let Me translate Ji Sweetu ❤️ @CuteBubble :tso:
 
थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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Yeh sirf ek poem nahi hai, yeh garv aur shaurya ki ek zor-daar huṁkār hai.

Har line mein strength, honour aur gehra self-respect feel hota hai.

Sach mein har word dil tak pahuncha. Respect
 
थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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यह महाराणा प्रताप हैं, स्वाभिमान की ज्वाला अपार,
सवा लाख पर भारी जो, झुका न कभी तलवार।
पगड़ी में बसा हिंदुस्तान, रण में सिंह समान,
इतिहास में अमर हुआ, मेवाड़ का महान।
 
थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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Niceee
 
कविता में एक बहादुर वीर की बात है, जो अपने देश और सम्मान के लिए हमेशा तैयार रहता है।
थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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Behatreen
 
यह महाराणा प्रताप हैं, स्वाभिमान की ज्वाला अपार,
सवा लाख पर भारी जो, झुका न कभी तलवार।
पगड़ी में बसा हिंदुस्तान, रण में सिंह समान,
इतिहास में अमर हुआ, मेवाड़ का महान।
waaaah!!! haanji Unke jese hi har ak Mhaan Yodha ke liye likha ji
 
थर्रा जाए काल भी जिससे, ऐसी इसकी काया है,
इसने मूँछों के ताव में, सारा जग झुकाया है...
सिर पर बँधा जो साफ़ा है, वो केवल एक वस्त्र नहीं,
शत्रु का संहार करे जो, उससे कम कोई अस्त्र नहीं...
रणभेरी जब-जब गूँजेगी, यह काल बनकर टूटेगा,
इसके स्वाभिमान के आगे, हर पर्वत भी फूटेगा...
नसों में बिजली दौड़ रही, आँखों में दहकता अंगारा,
काँप उठी धरती भी जब, इसने वीर घोष ललकारा...
झुके नहीं जो आंधी में, वो आन-बान की शान है,
यह मरुधरा का सिंह खड़ा, साक्षात वीर बलिदान है...
काट दे जो बाधाओं को, ऐसी इसकी धार है,
मिट्टी का यह लाल अकेला, सवा लाख पर भारी है...
नत मस्तक जो कभी न होगा, वह प्रचंड अभिमान है,
पगड़ी की हर एक सिलवट में, सिमटा हिंदुस्तान है...
चक्रवात सी मूँछें इसकी, काल को ललकारतीं,
इसकी आँखों की चमक ही, शत्रुओं को मारती...
यह शांत खड़ा है तो मत समझो, यह केवल एक इंसान है,
इसके भीतर सोया हुआ, सदियों का स्वाभिमान है...
रक्त में इसके उबाल है, और भुजाओं में वज्र सा बल,
मातृभूमि की रक्षा को, यह तत्पर रहता हर पल...
जब-जब संकट छाया है, इसने ही शस्त्र उठाया है,
अपनी आन की खातिर इसने, शीश तलक चढ़ाया है...!!!

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The Pride of Hindustan.
Awesome Intelligence
 
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