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जो हुआ सो हुआ तू क्यूं रोता है... दर पर आने वालों का दिल खोल सम्मान किया... हिम्मत भर साथ रहा रहमत भर प्यार दिया... ताड़ सा ऊँचा नहीं , तू तो वट वृक्ष सा विशाल है ...
We must accept finite disappointment, but never lose infinite hope