हो, गोपियाँ तारे हैं, चाँद है राधा
फिर क्यूँ है उसको बिस्वास आधा?
हो, गोपियाँ तारे हैं, चाँद है राधा
फिर क्यूँ है उसको बिस्वास आधा
कान्हा जी का जो सदा इधर-उधर ध्यान रहे
राधा बेचारी को फिर अपने पे क्या मान रहे?
गोपियाँ आनी-जानी हैं
राधा तो मन की रानी है
गोपियाँ आनी-जानी हैं
राधा तो मन की रानी है
साँझ-सखारे, जमुना किनारे
"राधा, राधा, " ही कान्हा पुकारे

Radha nai he mere paas
bathao ab kon jalegi??
,for your deep contemplation just sit beside you looking at your eyes to try and find you...