वक़्त ख़ुद नज़र नहीं आता,
लेकिन उसकी चाल में बहुत कुछ उजागर हो जाता है
वही वक़्त हमें सिखाता है—
कौन साथ निभाने वाला है,
कौन सिर्फ़ नाम का अपना था,
और टूटकर भी हम कितनी बार खुद को समेट सकते हैं,
इंसान वक़्त से हारता नहीं,
वक़्त उसे गढ़ता है।
चुपचाप, धीरे-धीरे,
मजबूत… और पहले से कहीं ज़्यादा समझदार।