Kartik227
Newbie
वो रोज़ उसी बस स्टॉप पर मिलते थे…
ना कभी बात हुई, ना किसी ने नाम पूछा…
बस नज़रें मिलती थीं, और दिल मुस्कुरा उठता था।
वो लड़का हर दिन थोड़ा पहले आ जाता,
सिर्फ इसलिए… ताकि वो उसे आते हुए देख सके।
और वो लड़की भी… हल्की सी मुस्कान के साथ,
जैसे उसे सब पता हो।
बारिश के दिन, वो उसके लिए छाता लेकर खड़ा रहता…
पर कभी आगे बढ़कर दिया नहीं।
और वो भी भीगती रही…
पर कभी माँगा नहीं।
दिन बीतते गए…
ये खामोश रिश्ता गहरा होता गया।
फिर एक दिन…
बस आई, वो चढ़ी… और चली गई।
उस दिन के बाद… वो कभी वापस नहीं आई।
लड़का आज भी उसी बस स्टॉप पर आता है…
उम्मीद लेकर… कि शायद एक दिन,
वो फिर से उसी मुस्कान के साथ सामने आ जाए।
ना कभी बात हुई, ना किसी ने नाम पूछा…
बस नज़रें मिलती थीं, और दिल मुस्कुरा उठता था।
वो लड़का हर दिन थोड़ा पहले आ जाता,
सिर्फ इसलिए… ताकि वो उसे आते हुए देख सके।
और वो लड़की भी… हल्की सी मुस्कान के साथ,
जैसे उसे सब पता हो।
बारिश के दिन, वो उसके लिए छाता लेकर खड़ा रहता…
पर कभी आगे बढ़कर दिया नहीं।
और वो भी भीगती रही…
पर कभी माँगा नहीं।
दिन बीतते गए…
ये खामोश रिश्ता गहरा होता गया।
फिर एक दिन…
बस आई, वो चढ़ी… और चली गई।
उस दिन के बाद… वो कभी वापस नहीं आई।
लड़का आज भी उसी बस स्टॉप पर आता है…
उम्मीद लेकर… कि शायद एक दिन,
वो फिर से उसी मुस्कान के साथ सामने आ जाए।
