क्या फर्क पड़ता है कि
जिंदगी तुम्हारी है या मेरी
खर्च तो हो ही रही है न।
क्या फर्क पड़ता है कि
दर्द तुम्हारे दिल में हो रहा है या मेरे
धड़कन तो बैठ ही रही है न।
क्या फर्क पड़ता है कि
माफी पहले कौन मांगता है
तुम कि मैं...
सफर तो अच्छा कट ही जायेगा न।
कोई फर्क नहीं पड़ता इस बात से
कि नई शुरुआत की पहल तुम करो या मैं
रिश्ता तो हमारा बच ही जाएगा न।
कोई फर्क नहीं पड़ता कि दो कदम
कौन बढ़ाता है दूसरे की ओर
घर तो घर रह जायेगा न।



जिंदगी तुम्हारी है या मेरी
खर्च तो हो ही रही है न।
क्या फर्क पड़ता है कि
दर्द तुम्हारे दिल में हो रहा है या मेरे
धड़कन तो बैठ ही रही है न।
क्या फर्क पड़ता है कि
माफी पहले कौन मांगता है
तुम कि मैं...
सफर तो अच्छा कट ही जायेगा न।
कोई फर्क नहीं पड़ता इस बात से
कि नई शुरुआत की पहल तुम करो या मैं
रिश्ता तो हमारा बच ही जाएगा न।
कोई फर्क नहीं पड़ता कि दो कदम
कौन बढ़ाता है दूसरे की ओर
घर तो घर रह जायेगा न।



