एक समय की बात है…
दो दोस्त थे। नाम नहीं, पहचान नहीं—बस एक रिश्ता था, जो हर नाम से बड़ा था।
वे रोज़ साथ बैठते, साथ हँसते, एक-दूसरे की छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूंढ लेते।
एक की ख़ामोशी, दूसरे को समझ आ जाती थी।
एक की परेशानी, दूसरे के चेहरे पर दिख जाती थी।
वक़्त गुजरता गया…
ज़िंदगी ने दोनों को अलग...