अब तो अपने ही अपनों को, बेगाना समझते हैं
सिर्फ अपने घर को ही सारा, जमाना समझते हैं
भुला डाली है लोगों ने, परिभाषा अपनेपन की
वो खून के रिश्तों को केवल, फ़साना समझते हैं
भले ही मतलब के वास्ते, बहा लें दो चार आंसू
वरना मौत की खबर को भी, बहाना समझते हैं
अब तो इतना गिर चुके हैं लोग, अपने ईमान से
कि...