रात आठ बजे "जान" थी, ग्यारह बजे "मेरी जान से प्यारी",
सुबह छह बजे तक ऑफ़र ख़त्म, और ग़ायब सारी यारी।
"सीरियस हूँ मैं तेरे लिए", ये डायलॉग रात का स्पेशल था,
दिन चढ़ते ही "कौन हो भाई?", ये तेरा असली रिसेप्शन था।
तेरे इश्क़ की वैलिडिटी भी, सिम कार्ड से कम निकली,
रिचार्ज रात भर का था, और सुबह तक नेटवर्क गुम निकली।
टर्म्स एंड कंडीशन्स में लिखा था, "बस मतलब तक चलेगा",
पर भाई, ये प्यार नहीं, हवस का सेल था, जो रात ढलते ही ढलेगा।
सुबह ब्लू टिक दिखे, पर रिप्लाई में सन्नाटा है,
"सीन" करके छोड़ दिया, ये कैसा तेरा घाटा है?
फिर स्टोरी में लिखता है "ट्रस्ट नहीं रहा किसी पर",
अरे भाई, पहले ख़ुद से पूछ, भरोसा तोड़ा किसने घर-घर?
और जब कोई आईना दिखाए, तो बन जाता है "बेचारा",
"सब लड़कियाँ/लड़के एक जैसे", ये तेरा रटा-रटाया नारा।
सच ये है कि प्यार नहीं, तेरी नीयत ही थी खोटी,
और दुनिया पूछे तो बोलता है, "क़िस्मत ही थी मेरी छोटी!"
सुबह छह बजे तक ऑफ़र ख़त्म, और ग़ायब सारी यारी।
"सीरियस हूँ मैं तेरे लिए", ये डायलॉग रात का स्पेशल था,
दिन चढ़ते ही "कौन हो भाई?", ये तेरा असली रिसेप्शन था।
तेरे इश्क़ की वैलिडिटी भी, सिम कार्ड से कम निकली,
रिचार्ज रात भर का था, और सुबह तक नेटवर्क गुम निकली।
टर्म्स एंड कंडीशन्स में लिखा था, "बस मतलब तक चलेगा",
पर भाई, ये प्यार नहीं, हवस का सेल था, जो रात ढलते ही ढलेगा।
सुबह ब्लू टिक दिखे, पर रिप्लाई में सन्नाटा है,
"सीन" करके छोड़ दिया, ये कैसा तेरा घाटा है?
फिर स्टोरी में लिखता है "ट्रस्ट नहीं रहा किसी पर",
अरे भाई, पहले ख़ुद से पूछ, भरोसा तोड़ा किसने घर-घर?
और जब कोई आईना दिखाए, तो बन जाता है "बेचारा",
"सब लड़कियाँ/लड़के एक जैसे", ये तेरा रटा-रटाया नारा।
सच ये है कि प्यार नहीं, तेरी नीयत ही थी खोटी,
और दुनिया पूछे तो बोलता है, "क़िस्मत ही थी मेरी छोटी!"