हक्कू जी 
Haa kabhi kabhiबहोत खूब लिखा है
आप खुद इतना अच्छा लिखते हो पता नही था
Thank youBadiya
Wahh bhai tum to expert ho likhne MaiWallah Habibi , Bahot Acche.
हक्कू जी
आपकी पंक्तियों में गहरा दर्द ज़िम्मेदारी का बोझ और अधूरी ख़्वाहिशों की एक गहरी टीस साफ़ महसूस हो रही है।
Mard ki khamoshi Aur uski sahanshilta ko aapne bahut hi sanjidagi aur khubsurti se shabdon mein piroya hai.
इस गहरे अहसास को मुकम्मल करने के लिए कुछ पंक्तियाँ मेरी तरफ से भी :-
Janab Jara Gaur Farmaiyega
पीठ पर ज़िम्मेदारियों का बस्ता और चेहरे पर मुस्कान रखते हैं ,
वो मर्द ही हैं , जो अपने टूटे ख़्वाबों का भी एक जहान रखते हैं।
जताते नहीं कभी कि कितना दर्द है इस सीने में ,
बस अपनों की ख़ुशी के लिए वो उम्र भर घुट-घुट कर जीते हैं।
View attachment 435667