• We kindly request chatzozo forum members to follow forum rules to avoid getting a temporary suspension. Do not use non-English languages in the International Sex Chat Discussion section. This section is mainly created for everyone who uses English as their communication language.

I think most related poem from my side.....

Kartik227

Epic Legend
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
 
Physical death is easy; it will happen even if you don't want it to.

Mahamrityu - The great death is our ego, our notions, and perceptions. Break the shackles and be free. That's the kind of death one should strive for. Only a courageous one can even attempt it.

So tell me, which do you prefer?
 
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
सफलता और असफलता, सुख-दुख को समान भाव से देखने वाला ही सच्चा योगी होता है और जीवन में कभी भी संघर्ष से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि
संघर्ष
ही जीवन का सार
है, इसके बिना कोई भी सफलता संभव नहीं है। याद रखों

Positive mind
Positive thought
Positive life

Jug Jug Jiyo ❤️
 
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
Ist your last day on Forum? I would miss you .
:cry1:
 
Physical death is easy; it will happen even if you don't want it to.

Mahamrityu - The great death is our ego, our notions, and perceptions. Break the shackles and be free. That's the kind of death one should strive for. Only a courageous one can even attempt it.

So tell me, which do you prefer?
Nice thought Cheetra , I appreciated :clapping::clapping::clapping:
 
सफलता और असफलता, सुख-दुख को समान भाव से देखने वाला ही सच्चा योगी होता है और जीवन में कभी भी संघर्ष से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि
संघर्ष
ही जीवन का सार
है, इसके बिना कोई भी सफलता संभव नहीं है। याद रखों

Positive mind
Positive thought
Positive life

Jug Jug Jiyo ❤️
Oho kya baat hai badiya thought :heart1::heart1:
 
Physical death is easy; it will happen even if you don't want it to.

Mahamrityu - The great death is our ego, our notions, and perceptions. Break the shackles and be free. That's the kind of death one should strive for. Only a courageous one can even attempt it.

So tell me, which do you prefer?
Well said
 
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
Bhai thoda Chhota poem hota achha hota
 
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
Bahot Khub Ji.. :clapping:


Ispe Mai Bhi Aage Kuch Kehna Chahunga - :)


चेहरे पर हँसी और दिल में तूफान छुपाए बैठा हूँ ,

मैं खुद को ही खुद से हर रोज़ हराए बैठा हूँ।

सब पूछते हैं मुझसे कि क्या हाल है मेरा ,

और मैं टूट कर भी ठीक हूँ की झूठी दीवाल बनाए बैठा हूँ।

जिन्हें अपना समझा , वो राहों में तनहा छोड़ गए ,

मेरे सारे हसीन ख्वाब मजबूरियों के हाथों टूट गए।

दिल कहता है कि अब थक कर ठहर जा ‘राही’ ,

पर दिमाग की जिद पर , मैं आज भी कदम बढ़ाए बैठा हूँ।

रातों की नींद उड़ गई , यादों का पहरा भारी है ,
इस अकेलेपन में सांसों की बस एक रस्म जारी है।


शायद कोई मेरी आँखों की इस नमी को पढ़ पाए ,

इसी एक धुंधली सी उम्मीद में , मैं खुद को मौत के करीब पाए बैठा हूँ।


istockphoto-1230330037-612x612.jpg
 
Physical death is easy; it will happen even if you don't want it to.

Mahamrityu - The great death is our ego, our notions, and perceptions. Break the shackles and be free. That's the kind of death one should strive for. Only a courageous one can even attempt it.

So tell me, which do you prefer?
Dissolving ego-driven desires
 
चलो अब मर जाता हूँ



न जाने क्या बात हुई,
हर खुशी क्यों आज ख़फ़ा हुई,
हर जंग में हार रहा हूँ,
फिर भी खुद को सँभाल रहा हूँ,
खुद से ही खुद को समझाता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

चेहरे पर हँसी रखता हूँ,
अंदर से मगर रोज़ बिखरता हूँ,
सबको कहता हूँ “ठीक हूँ मैं”,
पर खुद से ही पूछता हूँ—“कहाँ हूँ मैं?”
फिर अपनी ही ख़ामोशी से कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

जिन्हें अपना समझा, वो दूर हो गए,
मेरे सारे ख़्वाब मजबूर हो गए,
जिस रास्ते पर उम्मीद लेकर चला था,
वहीं हर कदम पर अकेला मिला था,
फिर भी जाने क्यों आगे बढ़ता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

रातों ने मुझसे नींद छीन ली,
यादों ने हर खुशी कहीं दफ़्न कर दी,
दिल कहता है अब कुछ नहीं बचा,
दिमाग कहता है—“थोड़ा और चल ज़रा”,
इसी जंग में खुद को रोज़ हराता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।

शायद कोई समझे मेरी ख़ामोशी,
शायद कोई पढ़ ले आँखों की नमी,
शायद किसी दिन ये दर्द भी कम हो जाए,
शायद मेरा टूटा दिल फिर मुस्कुराए,
फिर भी आज खुद से यही कहता हूँ—
चलो अब मर जाता हूँ।,


Written By Jarvis
Sometimes the real victory is not giving up when life becomes difficult
Letting go of the old pain and negative thoughts can be a new beginning
Life may test us but we should keep moving forward with hope and a positive mind ❤️

And yes after reading all these deep thoughts my brain is asking for a small tea break
 
Sometimes the real victory is not giving up when life becomes difficult
Letting go of the old pain and negative thoughts can be a new beginning
Life may test us but we should keep moving forward with hope and a positive mind ❤️


And yes after reading all these deep thoughts my brain is asking for a small tea break
Right afte so much time you reply or recaxt on my post
 
Top