ख्वाब और हक़ीक़त
ख़्वाब तो ख़ूबसूरत होते हैं,
हर रात नई कहानी देते हैं,
जो चाहो वो पास दिखाते हैं,
टूटे दिल को भी मुस्कान देते हैं।
मगर तकलीफ़ हक़ीक़त देती है,
जो अपना है, उसका एहसास देती है,
कौन साथ है, कौन बस नाम का,
हर चेहरे की पहचान देती है।
ख़्वाबों में दर्द कहाँ होता है,
वहाँ हर मौसम सुहाना होता है,
हक़ीक़त में जो आँसू मिलते हैं,
वहीं इंसान को ख़ुद से मिलना होता है।
इसलिए ख़्वाब देखना मत छोड़,
चाहे हक़ीक़त कितनी भी सताए,
क्योंकि ख़्वाब जीने की वजह देते हैं,
और तकलीफ़ जीना सिखाए।
— Jarvis