कुछ लम्हे आवाज़ नहीं करते,
बस दिल में शोर छोड़ जाते हैं…
इस तस्वीर में सिर्फ़ दो लोग नहीं हैं,
एक टूटता भरोसा,
एक थकता साथ,
और ढेर सारी ख़ामोशी है…
कभी-कभी पास बैठा इंसान भी
बहुत दूर लगने लगता है…
और वही दूरी सबसे ज़्यादा दर्द देती है...
यही तो हुआ तेरे और मेरे साथ
साथ रह के भी दूरी आ गई...
कौन किससे थका पता नहीं
अब दर्द भी बढ़ने सा लगा है।
पता नहीं खुशी मिली या तसल्ली
बस दिल में शोर छोड़ जाते हैं…
इस तस्वीर में सिर्फ़ दो लोग नहीं हैं,
एक टूटता भरोसा,
एक थकता साथ,
और ढेर सारी ख़ामोशी है…
कभी-कभी पास बैठा इंसान भी
बहुत दूर लगने लगता है…
और वही दूरी सबसे ज़्यादा दर्द देती है...
यही तो हुआ तेरे और मेरे साथ
साथ रह के भी दूरी आ गई...
कौन किससे थका पता नहीं
अब दर्द भी बढ़ने सा लगा है।
पता नहीं खुशी मिली या तसल्ली

